श्याम मेरी चुनर पे रंग मत डाल होली भजन

श्याम मेरी चुनर पे रंग मत डाल होली भजन लिरिक्स

श्याम मेरी चुनर पे,
रंग मत डाल,
विनती करूं पैया पडु,
तोरे बार-बार।।

भर पिचकारी कान्हा,
सन्मुख ना मारो,
अबीर गुलाल मेरे,
मुख पे ना डारो,
आज आई -2,
करके मैं सोलह श्रृंगार,
विनती करूं पैया पडु,
तोरे बार-बार।।

बीच बजरिया,
ना रोको मुरारी,
जाने दो श्याम,
मत आवो अगाड़ी,
पकड़ो ना बहिया जी-2,
पराई हू नार,
विनती करूं पैया पडु,
तोरे बार-बार।।

संग सहेली सब,
हांसी करेगी,
सास ननंद की मोहे,
डांट पड़ेगी,
झगडेंगे सैया जी-2,
घर पे हमार,
विनती करूं पैया पडु,
तोरे बार-बार।।

‘मंत्री’ कहे विनती,
अब सुन लो हमारी,

भक्त ‘दयाल’ रहे,
शरण तुम्हारी,
श्याम तेरे चरणों में-2,
जाऊं बलिहार,
विनती करूं पैया पडु,
तोरे बार-बार।।श्याम मेरी चुनर पे,रंग मत डाल,
विनती करूं पैया पडु,
तोरे बार-बार।।

होली खेले बाबा श्याम आपा चाला खाटू धाम

होली खेले बाबा श्याम आपा चाला खाटू धाम भजन लिरिक्स

होली खेले बाबा श्याम,
आपा चाला खाटू धाम,
होली खेले रे।।

लाल अभीर गुलाल उड़त है,
केशर ओर किस्तुरी रे,
स्वर्ग से सुन्दर लाग म्हाने,
खाटू नगरी रे,
होली खेले रे।

होली खेलें बाबा श्याम,
आपा चाला खाटू धाम
होली खेले रे।।

श्याम श्याम खाटू में गुंजे,
डपली चंग बजाव रे,
भक्ता सागे नाचे गावे,
धुम मचाव रे,
होली खेले रे।

होली खेलें बाबा श्याम,
आपा चाला खाटू धाम
होली खेले रे।।

श्यामधणी रे हाथा माही,
रंग भरी पिचकारी रे,
भक्ता उपर श्यामधणी तो,
भर-भर मारी रे,
होली खेले रे।


होली खेलें बाबा श्याम,
आपा चाला खाटू धाम
होली खेले रे।।


रंग रगीलो फागण आयो,
भक्ता क मन भायो रे,
नौरतन योगी को भी बाबा,
मन हर्षायो रे,
होली खेले रे।।

होली खेलें बाबा श्याम,

आपा चाला खाटू धाम
होली खेले रे।।










आयो होरी को त्यौहार चलो वृन्दावन को चाले


आयो होरी को त्यौहार चलो वृन्दावन को चाले लिरिक्स

आयो होरी को त्यौहार,
चलो वृन्दावन को चाले,
चलो वृन्दावन को चालै,
आयो होली को त्यौहार,
चलो वृन्दावन को चाले।

सुन-सुन री सखी ललिता,
रंगों की थाली लाना,
और सुन री सखी विशाखा,
तू मन मोहन को भिगाना,
रंगों की डार फ़ुहार,
चल वृन्दावन को चाले,
आयो होली को त्यौहार,
चलो वृन्दावन को चाले।

है बहुत चतुर यो सयानों,
वो यशोमती को लालो,
है बड़ो ही जादुगर यो,
मनमोहन मुरली वालो,
नैनन से करता वार,
चलो वृन्दावन को चाले,
आयो होली को त्यौहार,
चलो वृन्दावन को चाले।

वाको रंग है कारो-कारो,
वाको लाल मोहे है करनो,
रंग भर भर के पिचकारी,
मोहे मनमोहन को रंगनो,
दूंगी वाकी अकड़ उतार,
चलो वृन्दावन को चाले,
आयो होली को त्यौहार,
चलो वृन्दावन को चाले।

आयो होरी को त्यौहार,
चलो वृन्दावन को चाले,
चलो वृन्दावन को चालै,
आयो होली को त्यौहार,
चलो वृन्दावन को चाले।

Aayo Holi Ko Tyonhar Lyrics


Aayo Hori Ko Tyauhaar,
Chalo Vrndaavan Ko Chaale,
Chalo Vrndaavan Ko Chaalai,

Aayo Holi Ko Tyauhaar,
Chalo Vrndaavan Ko Chaale.

Sun-sun Ri Sakhi Lalita,
Rangon Ki Thaali Laana,
Aur Sun Ri Sakhi Vishaakha,
Tu Man Mohan Ko Bhigaana,
Rangon Ki Daar Fuhaar,
Chal Vrndaavan Ko Chaale,
Aayo Holi Ko Tyauhaar,
Chalo Vrndaavan Ko Chaale.

Hai Bahut Chatur Yo Sayaanon,
Vo Yashomati Ko Laalo,
Hai Bado Hi Jaadugar Yo,
Manamohan Murali Vaalo,
Nainan Se Karata Vaar,
Chalo Vrndaavan Ko Chaale,
Aayo Holi Ko Tyauhaar,
Chalo Vrndaavan Ko Chaale.

Vaako Rang Hai Kaaro-kaaro,
Vaako Laal Mohe Hai Karano,
Rang Bhar Bhar Ke Pichakaari,
Mohe Manamohan Ko Rangano,
Dungi Vaaki Akad Utaar,
Chalo Vrndaavan Ko Chaale,
Aayo Holi Ko Tyauhaar,
Chalo Vrndaavan Ko Chaale.

Aayo Hori Ko Tyauhaar,
Chalo Vrndaavan Ko Chaale,
Chalo Vrndaavan Ko Chaalai,
Aayo Holi Ko Tyauhaar,
Chalo Vrndaavan Ko Chaale.

Holika Dahan Puja Vidhi 2022

 होलिका दहन आज, जानें पूजा विधि, पूजन सामग्री और शुभ मुहूर्त 2022

Holika Dahan 2022 Timing: हिंदू धर्म में होली का त्योहार धूमधाम से मनाया जाता है। लोग एक दूसरे को रंग लगाकर इस त्योहार को सेलीब्रेट करते हैं। आपको बता दें कि रंग वाली होली से एक दिन पहले होलिका दहन की पूजा की जाती है। मतलब जहां होली जलाई जाती है वहां पूजा की जाती है। मान्यता है इस पूजा से घर में सुख- समृद्धि का वास होता है और गुप्त शत्रुओं का भी नाश होता है।
आइए जानते हैं होलिका दहन की पूजा विधि और शुभ मुहूर्त…

होलिका दहन शुभ मुहूर्त: इस साल होलिका दहन 17 मार्च दिन गुरुवार को है। मतलब 17 मार्च को होलिका दहन का मुहूर्त रात 09 बजकर 06 मिनट से रात 10 बजकर 16 मिनट तक है। लेकिन इस समय में भद्रा की पूंछ रहेगी। शास्त्रों के अनुसार भद्रा पूंछ में होलिका दहन कर सकते हैं। इसलिए 17 मार्च को रात 09 बजकर 06 मिनट से होलिका दहन हो सकता है। क्योंकि इस दिन भद्रा का समापन देर रात 01 बजकर 12 मिनट पर होगा। यदि जो लोग भद्रा के बाद होलिका दहन करना चाहते हैं, तो उनके लिए मुहूर्त देर रात 01:12 बजे से 18 मार्च को सुबह 06:28 बजे तक है।


होलिका दहन के लिए पूजा सामग्री
होलिका दहन के लिए गोबर से बनी माला, रोली, अक्षत, एक लोटा जल, कच्चा सूत, साबुत हल्दी, मूंग, गुलाल, नारियल, बताशे, गंध, फूल, फल और गेहूं की बालियां अपने पास रखें।


होलिका दहन से पहले क्या करना चाहिए?
होलिका दहन से पहले आपको और आपके सभी परिवार के सदस्यों को हल्दी का उबटन,सरसो तेल में मिलाकर पूरे बदन पर करना चाहिए।
फिर सूखने के बाद उसे शरीर से छुड़ाकर एक कागज में जमा कर लें।
फिर आप 5 या 11 गाय के उपले, एक मुट्ठी सरसो के दाने, नारियल का सूखा गोला लें।
फिर नारियल के सूखे गोले में जौ,तिल,सरसो का दाना,शक्कर,चावल और घी भर लें।
फिर उसे होलिका की जलती हुई अग्नि में प्रवाहित कर दें। साथ में उबटन के निकाले गए अंश को भी अग्नि में डाल दें
होलिका दहन होने से पहले या फिर बाद में शाम के वक्त घर में उत्तर दिशा में शुद्ध घी का दीपक जलाएं। मान्यता है कि ऐसा करने से घर में सुख शांति आती है।
होलिका का परिक्रमा करने का भी बहुत महत्व है। ऐसा करने से हर तरह की परेशानियां, रोग और दोष खत्म हो जाते हैं। इसलिए आप परिक्रमा जरूर करें।



भद्राकाल के बाद करें होलिका दहन
होलिका दहन के लिए रात का समय उपर्युक्त माना गया है, ऐसे में 12:58 बजे भद्राकाल समाप्त होने के बाद होलिका दहन संभव हो सकेगा। रात के समय होलिका दहन करने के लिए शुभ समय 12:58 बजे से लेकर रात 2:12 बजे तक है।


होलिका दहन की तैयारी: सुबह उठकर स्नान कर लें और अगर होलिका व्रत रखना चाहते हैं तो व्रत का संकल्प लें। दोपहर के समय जिस जगह होलिका दहन करना चाहते हैं उस स्थान को साफ कर लें। वहां होलिका का सभी सामान सूखी लकड़ी, उपले, सूखे कांटे रख दें। गोबर से होलिका और प्रह्लाद की प्रतिमा बनाएं। नरसिंह भगवान की पूजा करें। भगवान को पूजन सामग्री अर्पित करें।


पढ़ें नरसिंह भगवान की आरती
ॐ जय नरसिंह हरे, प्रभु जय नरसिंह हरे।
स्तम्भ फाड़ प्रभु प्रकटे,
स्तम्भ फाड़ प्रभु प्रकटे, जन का ताप हरे।।

ॐ जय नरसिंह हरे, प्रभु जय नरसिंह हरे।
तुम हो दीन दयाला, भक्तन हितकारी,
प्रभु भक्तन हितकारी।।

अद्भुत रूप बनाकर,अद्भुत रूप बनाकर, प्रकटे भय हारी।
ॐ जय नरसिंह हरे, प्रभु जय नरसिंह हरे।।

सबके ह्रदय विदारण।
दुस्यु जियो मारी, प्रभु दुस्यु जियो मारी,
दास जान अपनायो, दास जान अपनायो, जन पर कृपा करी।।

ब्रह्मा करत आरती, माला पहिनावे, प्रभु माला पहिनावे।
शिवजी जय जय कहकर, पुष्पन बरसावे।।

ॐ जय नरसिंह हरे, प्रभु जय नरसिंह हरे।।


शत्रु से शांति के लिए उपाय
शत्रु से शांति के लिए भगवान विष्णु से प्रार्थना कर सात गोमती चक्र होलिका के में डाल दें शत्रु से छुटकारा मिल जाएगा ।



नवविवाहिता से क्यों नहीं कराया जाता होलिका दहन
होलिका दहन की अग्नि को जलते हुए शरीर का प्रतीक माना जाता है। इस वजह से मान्यता है कि नवविवाहित महिलाओं को इस अग्नि को जलते हुए नहीं देखना चाहिए। इसी वजह से नवविवाहिता स्त्री से होलिका दहन भी नहीं कराया जाता है


रोगी करें इस मंत्र का जाप
रोगी को स्वस्थ होने के लिए इस रात्रि आरोग्य मंत्र का ज्यादा से ज्यादा जाप करें और होलिका आरोग्य मंत्र हैः अच्युतानंद गोविंद नामोच्चारणभेषजात।नश्यन्ति सकला रोगाः सत्यम् सत्यम् वदाम्यहम्।



होलिका दहन पर बनेंगे ये तीन शुभ योग
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार इस बार गुरु ग्रह की दृष्टि संबंध चंद्रमा से होने के कारण गजकेसरी योग का निर्माण होने वाला है। इसके अलावा इस दिन वरिष्ठ और केदार योग भी बनने वाले हैं।



होलिका की राख से जुड़े उपाय
- धूल की वंदना करनी चाहिए और होलिका विभूति को यानि होली की राख को धारण करना चाहिए। साथ ही मिट्टी से स्नान करने की भी परंपरा है।
- होली के दिन घर के आंगन में एक वर्गाकार आकृति बनाकर उसके मध्य में कामदेव की पूजा करनी चाहिए। प्रार्थना करते हुए कहना चाहिए- कामदेवता मुझपर प्रसन्न हों। साथ ही जितना हो सके ब्राह्मण आदि को दान करना चाहिए।
- वास्तु शास्त्र के अनुसार होली जलाने के बाद इसकी राख को लाकर घर के आग्नेय कोण, यानी दक्षिण-पूर्व दिशा में रखना चाहिए। आग्नेय कोण को घर में अग्नि तत्व का सही स्थान माना जाता है और यहीं पर अपनी रसोई रखनी चाहिए।
मान्यता के अनुसार, इस दिशा में होली की राख रखने से व्यापार और व्यावसायिक जीवन में लाभ होता है और व्यक्ति उन्नति के रास्ते पर आगे बढ़ता है। ऐसा करने से घर में सुख-शांति भी बनी रहती है।


होलिका दहन पूजा मंत्र
होली पर कई टोटके भी क‍िए जाते हैं। होली पर इस मंत्र का जाप भाग्‍य उदय करने वाला और मुसीबतें दूर करने वाला माना जाता है।
देखें मंत्र :
अहकूटा भयत्रस्तै: कृता त्वं होलि बालिशै: अतस्वां पूजयिष्यामि भूति-भूति प्रदायिनीम:
ध्‍यान रखें क‍ि इस मंत्र का जप एक, तीन या पांच माला यानी विषम संख्या में क‍िया जाता है।


होलिका दहन में अर्पित करें यह तीन चीजें
ऐसा माना जाता है कि होलिका दहन में उंबी दहन करने से ईश्वर का आशीर्वाद मिलता है इसके साथ घर में सुख-समृद्धि बनी रहती है। उंबी के साथ इस दिन गोबर के बड़कुले की माला भी अर्पित करनी चाहिए। नारियल अर्पित करना भी शुभ माना गया है।


कब बन रहा है उत्तम मुहूर्त
होलिका दहन इस वर्ष 17 मार्च को पड़ रही है। होलिका दहन के दिन लोग आग के साथ अपने पापों को भी जला देते हैं। माना जाता है कि होलिका दहन की वजह से घर में सकारात्मकता आती है। होलिका दहन पर रात को 2:12 के बाद ब्रह्म मुहूर्त शुरू हो जाएगा जो बेहद उत्तम माना जा रहा है।


होलिका दहन कब होता है
फाल्गुन माह की पूर्णिमा के दिन होलिका दहन किया जाता है। सूरज डूबने के बाद शुभ मुहूर्त में ही होलिका दहन किया जाना चाहिए। इसे छोटी होली भी कहा जाता है। होलिका दहन के बाद ही रंगों से खेला जाता है।