नील सरस्वती स्तोत्र (Neel Saraswati Stotram)



घोर रूपे महारावे सर्वशत्रु भयंकरि।
भक्तेभ्यो वरदे देवि त्राहि मां शरणा गतम्।।१।।

ॐ सुरासुरार्चिते देवि सिद्धगन्धर्वसेविते।
जाड्यपापहरे देवि त्राहि मां शरणा गतम्।।२।।

जटाजूटसमायुक्ते लोलजिह्वान्तकारिणि।
द्रुतबुद्धिकरे देवि त्राहि मां शरणा गतम्।।३।।

सौम्यक्रोधधरे रूपे चण्डरूपे नमोSस्तु ते।
सृष्टिरूपे नमस्तुभ्यं त्राहि मां शरणा गतम्।।४।।

जडानां जडतां हन्ति भक्तानां भक्तवत्सला।
मूढ़तां हर मे देवि त्राहि मां शरणा गतम्।।५।।

वं ह्रूं ह्रूं कामये देवि बलिहोमप्रिये नम:।
उग्रतारे नमो नित्यं त्राहि मां शरणागतम्।।६।।

बुद्धिं देहि यशो देहि कवित्वं देहि देहि मे।
मूढत्वं च हरेद्देवि त्राहि मां शरणा गतम्।।७।।

इन्द्रा दिविलसद द्वन्द्ववन्दिते करुणा मयि।
तारे ताराधिनाथास्ये त्राहि मां शरणा गतम्।।८।।

अष्टभ्यां च चतुर्दश्यां नवम्यां य: पठेन्नर:।
षण्मासै: सिद्धिमा प्नोति नात्र कार्या विचारणा।।९।।

मोक्षार्थी लभते मोक्षं धनार्थी लभते धनम्।
विद्यार्थी लभते विद्यां विद्यां तर्क व्याकरणा दिकम।।१०।।

इदं स्तोत्रं पठेद्यस्तु सततं श्रद्धयाSन्वित:।
तस्य शत्रु: क्षयं याति महा प्रज्ञा प्रजा यते।।११।।

पीडायां वापि संग्रामे जाड्ये दाने तथा भये।
य इदं पठति स्तोत्रं शुभं तस्य न संशय:।।१२।।

इति प्रणम्य स्तुत्वा च योनि मुद्रां प्रदर्श येत।।१३।।

।।इति नीलसरस्वतीस्तोत्रं सम्पूर्णम्।।

नील सरस्वती स्तोत्र का हिंदी अर्थ 
(Neel Saraswati Stotram)

हे देवी, अपनी विकराल और भयानक अभिव्यक्ति में, सभी विरोधियों में भय पैदा करते हुए,

अपने भक्तों पर अपना आशीर्वाद बरसाएं और अपनी शरण में मेरी रक्षा करें।

हे देवी, देवताओं और राक्षसों द्वारा समान रूप से पूजनीय, सिद्धों और गंधर्वों द्वारा सम्मानित,

हे देवी, जड़ता और पापों को दूर करने वाली, मेरी रक्षा करो, जो तुम में शरण चाहता है।

हे उलझे हुए बालों और उभरी हुई जीभ से सुशोभित, बुद्धि को जीवंत करने वाली देवी,

आपकी शरण में आने वाले मेरी रक्षा करें।

हे देवी, सौम्य और क्रोध दोनों रूपों से युक्त, मैं विनम्रतापूर्वक सृजन की प्रतीक आपको नमन करता हूं।

आपकी शरण में आने वाले मेरी रक्षा करें।

आप अज्ञानियों की अज्ञानता को दूर करते हैं और अपने भक्तों के प्रति स्नेह रखते हैं।

हे देवी, मेरी अज्ञानता दूर करो और मेरी रक्षा करो, जो तुममें शरण चाहता है।

हे देवी, मैं लालसा से ‘वं ह्रूं ह्रूं’ अक्षरों का आह्वान करता हूं। मैं यज्ञ से प्रसन्न होकर उग्र रूप में आपको प्रणाम करता हूँ।

मेरी रक्षा करो, जो तेरी शरण में आता हूँ।

हे देवी, मुझे बुद्धि प्रदान करो, मुझे यश प्रदान करो, मुझे काव्यात्मक वाक्पटुता प्रदान करो।

हे देवी, मेरी अज्ञानता दूर करो और तुम्हारी शरण में आने वाले मेरी रक्षा करो।

हे देवी, इंद्र और अन्य लोगों द्वारा पूजित, दयालु, आप शरण चाहने वालों की संरक्षक हैं।

मेरी रक्षा करो, जो तेरी शरण में आता हूँ।

जो कोई आठवें, चौदहवें या नौवें दिन इस स्तोत्र का पाठ करेगा,

उसे छह महीने के भीतर निःसंदेह सफलता प्राप्त होगी।

मुक्ति चाहने वाले को मुक्ति मिलती है, धन चाहने वाले को धन प्राप्त होता है,

ज्ञान चाहने वाले को तर्क और व्याकरण सहित गहन समझ प्राप्त होती है।

जो लोग श्रद्धापूर्वक नियमित रूप से इस भजन का पाठ करते हैं,

वे अपने शत्रुओं के विनाश और अपने भीतर महान ज्ञान के उदय का गवाह बनेंगे।

क्लेश, कलह, जड़ता, परोपकार या भय के समय, निस्संदेह,

जो लोग इस भजन को पढ़ते हैं उन्हें शुभता प्राप्त होती है।

इस प्रकार नमस्कार और स्तुति करने के बाद,

व्यक्ति को योनि मुद्रा प्रदर्शित करनी चाहिए, जो महिला प्रजनन अंग का प्रतीक है।

Neel Saraswati Stotram in English Lyrics

Ghorarupe maharave sarvasatrubhayankari
Bhaktebhyo varade devi trahi mam saranagatam

Om surasurarcite devi siddhagandharvasevite
Jadyapapahare devi trahi mam saranagatam

Jaṭajuṭasamayukte lolajihvantakarini
Drutabuddhikare devi trahi mam saranagatam

Saumyakrodhadhare rupe chandarupe namostute
Sṛṣṭirupe namastubhyam trahi mam saranagatam

Jadanam jadatam hanti bhaktanam bhaktavatsala
Mudhatam hara me devi trahi mam saranagatam

Vam hrum hrum kamaye devi balihomapriye namaḥ
Ugratare namo nityam trahi mam saranagatam

Buddhim dehi yaso dehi kavitvam dehi dehi me
Mudhatvam cha hareddevi trahi mam saranagatam

Indradivilasad-dvandvavandite karunamayi
Tare taradhinathasye trahi mam saranagatam

Aṣṭamyam cha caturdasyam navamyam yaḥ paṭhennaraḥ
Sanmasaih siddhimapnoti natra karya vicarana

Mokṣarthi labhate mokṣam dhanarthi labhate dhanam
Vidyarthi labhate vidyam tarkavyakaranadikam

Idam stotram paṭhedyastu satatam sraddhayanvitaḥ
Tasya satruḥ kṣayam yati mahaprajna prajayate

Pidayam vapi samgrame jadye dane tatha bhaye
Ya idam pathati stotram subham tasya na samsayaḥ

Iti pranamya stutva cha yonimudram pradarsayet

नील सरस्वती स्तोत्र को पढ़ने की विधि 
(Neel Saraswati Stotram)

प्रारंभ में, शुभ मुहूर्त चुनें और माता को ध्यान लगावें, शत्रु पर विजय पाने के लिए इस स्तोत्र का पाठ अष्टमी, नवमी और चतुर्दशी को अवश्य करना चाहिए।
पूजा स्थल को शुद्ध करें और मां सरस्वती की मूर्ति, या उनकी चित्र पर अपने ध्यान को केंद्रित करें।
मां सरस्वती की प्रतिमा या चित्र के सामने बैठें या खड़े रहे।
प्रारंभ करने से पहले, माता के ध्यान में चलें जाये और मां सरस्वती के चरणों में आवाहन करें।

फिर नील सरस्वती स्तोत्र (Neel Saraswati Stotram) का पाठ करें, विशेष ध्यान देते हुए मां सरस्वती की महिमा को स्तुति करें।
अंत में, मां सरस्वती को अर्पण करें और उनसे आशीर्वाद मांगें।
स्तोत्र का पाठ करते समय, शुद्धता, श्रद्धा, और समर्पण के साथ पूर्ण करें।

ध्यान रखें कि नील सरस्वती स्तोत्र (Neel Saraswati Stotram) का पाठ शुभ मुहूर्त (अष्टमी, नवमी और चतुर्दशी) में और नियमित रूप से किया जाना चाहिए ताकि मां सरस्वती की कृपा और आशीर्वाद प्राप्त हो सकें।

Neel Saraswati Stotram Video



श्री राम राम रामेति मंत्र (Sri Rama Rama Rameti Mantra)



“श्री राम राम रामेति रमे रामे मनोरमे

सहस्रनाम तत् तुल्यं रामनाम वरानने”

“shrii raam raam raameti rame raame manorame

sahasranaam tat tulyam raamanaam varaanane”

श्री राम राम रामेति मंत्र का अर्थ
 (Sri Rama Rama Rameti Mantra Meaning)


राम राम राम रमा अर्थात सीता की पति राम का नाम मनोरम है , भगवान राम का एक नाम सहस्त्र विष्णु के 1000 नामो के बराबर है।

श्री राम राम रामेति मंत्र विधि 
(Sri Rama Rama Rameti Mantra Vidhi)

ध्यान और शुद्धि: - मंत्र का जाप शुरू करने से पहले शुद्धता का पूरा ध्यान रखना चाहिए इसके लिए स्नान करके स्वक्छ साफ सुथरे कपडे पहनने चाहिए।
मंत्र का जाप: - “श्री राम राम रामेति” मंत्र का जाप करना शुरू करे इसे ध्यान पूर्वक मन को एकाग्र करके इसका पठन किया जाना चाहिए। यह मंत्र धीरे-धीरे और सुक्ष्मता से बोला जाता है।
माला का उपयोग: - माला का उपयोग करके मंत्र का जाप किया जाना चाहिए यह माला रुद्राक्ष का १०८ मोती वाला माला होना चाहिए प्रत्येक मंत्र के जप के बाद एक मोती को खिसका कर मंत्र का जाप करे इस प्रकार १०८ नार मंत्र का जाप करना चाहिए।
भावना और भक्ति: - मंत्र का जाप करते समय व्यक्ति को अपने मन में भगवान राम के प्रति भक्ति भक्ति और साधना में लगाकर मंत्र का जाप करना चाहिए।
नियमितता:
मंत्र के जाप में नियमिता बहुत की आवश्यक है यदि नियमित ढंग से ४० दिनों तक इस मंत्र का जाप करे तो हमें इसका लाभ जरूर मिलता है।

श्री राम राम रामेति मंत्र लाभ
 (Sri Rama Rama Rameti Mantra Benefit)
आत्मा का शांति: श्री राम राम रामेति मंत्र का नाम जाप करने से आत्मा को शांति मिलती है और मानव चेतना में सामंजस्य बनाये रखने में मदद करता है।
भक्ति में वृद्धि: श्री राम राम रामेति मंत्र जाप से भक्ति में वृद्धि होती है और निरंतर जाप करने से भगवान के प्रति आकर्षण बढ़ता है।
श्रीराम की कृपा: श्री राम राम रामेति मंत्र के नाम का जाप करने से व्यक्ति श्रीराम की कृपा को प्राप्त करता है और उसे अपने मार्ग पर मार्गदर्शन होता है।
कर्मयोग में समर्थता: श्री राम राम रामेति मंत्र जाप से मन को शांति मिलती है और व्यक्ति कर्मयोग में समर्थ होता है, जिससे उसके कार्यों में सकारात्मक परिणाम देखने को मिलते है।
चित्त की शुद्धि: - श्री राम राम रामेति मंत्र जाप के द्वारा मन की शुद्धि होती है और मानव जीवन में श्रद्धा और समर्पण बढ़ता है।
आध्यात्मिक विकास: - श्री राम राम रामेति मंत्र के नाम का जाप करने से व्यक्ति आध्यात्मिक दृष्टि से विकसित होता है और उसका जीवन में आध्यात्मिक परिवर्तन देखने को मिलता है। जिससे लाभ प्राप्त होता है।

यह सभी लाभ व्यक्ति की श्रद्धा और भक्ति के के ऊपर निर्भर होते है। इसमें आत्म-समर्पण और नियमितता की महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है ,इसलिए यह मंत्र सच्चे मन से करना चाहिए।

Sri Rama Rama Rameti Mantra Video



कामाख्या बीज मंत्र (Kamakhya Beej Mantra)



||क्लीं क्लीं कामाख्या क्लीं क्लीं नम:||

kliin kliin kaamaakhyaa kliin kliin namh

कामाख्या बीज मंत्र का अर्थ 
(Kamakhya Beej Mantra Meaning)

“क्लीं” – देवी कामाख्या का बीज मंत्र

“कामाख्या” – कामाख्या देवी का नाम

“नमः” – “नमस्कार”

अर्थ – हे कामाख्या देवी मैं आपका नमस्कार करता हूँ।

कामाख्या बीज मंत्र विधि 
(Kamakhya Beej Mantra Vidhi)

  • मंत्र का जाप करने से पूर्व शुध्दता का ध्यान देना चाहिए
  • मंत्र करने से पूर्व मांसाहारी भोजन लहसुन प्याज अन्य मसाले वाली भोज्य पदार्थ खाने से बचना चाहिए।
  • यह मंत्र का जाप प्रातः काल में करे।
  • मंत्र का जाप करने तक आप उपवास भी रह सकते है।
  • मंत्र का जाप करते समय मन में अन्य विचार नहीं आने चाहिए
  • माता को भोग के रूप में फल मेवे मिठाई आदि का उपयोग किया जा सकता है।
  • मंत्र का जाप करने के लिए आप रुद्राक्ष की 108 मोती की माला का उपयोग कर सकते है।
  • जातक द्वारा इस मंत्र का जाप 108 बार किया जा सकता है या अपनी शक्ति के अनुसार भी किया जा सकता है।
  • इस मंत्र का जाप ४१ दिनों तक नियमित रूप से करने पर हमें का, कामाख्या देवी का आर्शीवाद प्राप्त होता है।
  • मंत्र के समापन के बाद माता को लगाया गया भोग को प्रसाद के रूप में खाना चाहिए ,और अपनी पूजा का समापन माता का आशीर्वाद लेकर करना चाहिए।
कामाख्या बीज मंत्र लाभ 
(Kamakhya Beej Mantra Benefit)

आकर्षण में वृद्धि: - यह मंत्र साधक की आकर्षण को बढ़ाता है। यह उन्हें अपने साथी के प्रति अधिक आकर्षक बना सकता है और उन्हें एक सफल प्रेम जीवन जीने में मदद करता है।

उत्पादकता में वृद्धि: - यह मंत्र साधक की रचनात्मकता और उत्पादकता को बढ़ाने में मदद करता है। यह उन्हें अपने विचारों को अधिक स्पष्ट रूप से व्यक्त करने में मदद कर सकता है और उन्हें अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने में मदद कर सकता है।

शक्ति और आत्मविश्वास में वृद्धि: - यह मंत्र साधक की शक्ति और आत्मविश्वास को बढ़ा सकता है। यह उन्हें अपने जीवन में चुनौतियों का सामना करने और अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने में मदद कर सकता है।

तंत्र साधना में सफलता: - यह मंत्र तंत्र साधना में सफलता प्राप्त करने में मदद कर सकता है। यह साधक को देवी कामाख्या की शक्तियों तक पहुंचने और उन्हें अपने जीवन में प्रकट करने में मदद कर सकता है।
मनोकामना पूर्ति के: - इस मंत्र का जाप करने से हमारी मनोकामनाओ की पूर्ति होती है।
धन और समृद्धि के लिए :- इस मंत्र का जाप करने से धन समृद्धि में वृद्धी होती है

आध्यात्मिक उत्थान के लिए :- मंत्र का नियमित रूप से जप करने से अध्यात्म क्र प्रति रूचि बढ़ती है।

काले जादू से रक्षा : -इस मंत्र का जाप करने से काले जादू से बचा जा सकता है।

विवाह की समस्या से मुक्ति :- जिनके विवाह में समस्या आ रही है उनके द्वारा इस मंत्र का जप करना बहुत ही ज्यादा लाभकारी माना जाता है।

Kamakhya Beej Mantra Video



महादेव गायत्री मंत्र (Mahadev Gayatri Mantra)



महादेव गायत्री मंत्र 
(Mahadev Gayatri Mantra)

ॐ तत्पुरुषाय विद्महे,

महादेवाय धीमहि,

तन्नो रूद्र प्रचोदयात्।

om tatpurushaay vidmahe,

mahaadevaay dhiimahi,

tanno ruudr prachodayaat.

महादेव गायत्री मंत्र का अर्थ 
(Mahadev Gayatri Mantra Meaning)

हे तत्पुरुष स्वरुप, हे महादेव, हमें ज्ञान प्रदान कीजिये। हे रुद्र, हमें प्रेरणा प्रदान कीजिये।

महादेव गायत्री मंत्र विधि 
(Mahadev Gayatri Mantra Vidhi)

  • शुद्धि:श्नान करके स्वयं को शुद्ध करे और शुद्ध वस्त्र पहनें।
  • आसन:योगासन या पूजा के लिए स्थिर अपने सुविधा के अनुसार आसन में बैठें।
  • मंत्र जाप:ध्यान करते हुए आत्मा को उच्च और शुद्धता की दिशा में लेकर महादेव गायत्री मंत्र का जाप करें
  • माला का उपयोग:मंत्र का जाप करते समय माला का उपयोग करें, जिसमें 108 मोतियों की माला होनी चाहिए।
  • हर बार मंत्र को एक मोती पर पढ़ें और फिर माला को एक मोती आगे बढ़ाएं और गिनते जाये।
  • ध्यान:मंत्र जाप के दौरान महादेव की ध्यान में रहें और सच्चे मनसे भगवान से आशीर्वाद मांगें।
  • समापन:मंत्र जाप के बाद, महादेव की पूजा करें और आशीर्वाद मांगें।
  • धन्यवाद अर्पित करें और शांति से अपने आद्यात्मिक साधना को समाप्त करें।
महादेव गायत्री मंत्र लाभ 
(Mahadev Gayatri Mantra Benefit)

आध्यात्मिक जागृति – महादेव गायत्री मंत्र का भक्ति और ईमानदारी से जाप करने से आध्यात्मिक जागृति होती है। और जप करने वले व्यक्ति का आध्यात्मिक संबंध गहरा होता है। ऐसा भी माना जाता है कि व्यक्तियों को चेतना की उच्च अवस्था प्राप्त करने और अपने अंदर दिव्य भक्ति कि उपस्थिति को अनुभव कराने में हमारी मदद करता है।

बाधाओं से सुरक्षा ओर निवारण – नकारात्मक ऊर्जाओं के सुरक्षा पाने और जीवन में बाधाओं से चुनौतिओं को दूर करने के लिए अक्सर इस मंत्र का जाप किया जाता है। इस मंत्र का जाप करने से अभ्यासकर्ता के चारो ओर एक सुरक्षा कवच बन जाता है जिससे में आने वाली सारी बाधाओं और समस्याओं से मुक्ति मिल जाती है।

आंतरिक शांति और संतुलन – महादेव गायत्री मंत्र का कंपन और पाठ मन को शांत करके तनाव को कम करने और आंतरिक शक्ति लाने में मदद करता है इस मंत्र का जाप करने से मन शुद्ध हो जाता है। और व्यक्ति सामाजिक मानसिक और आध्यात्मिक पहलुओं के बीच में अच्छा संतुलन बनाने में मदद करता है।

परिवर्तन और मुक्ति – महादेव भगवान को अज्ञानता का विनाशक और परिवर्तन लाने वाले के रूप में जाना जाता है। महादेव गायत्री मंत्र का पाठ करने से आशक्ति से मुक्त तथा साथ में ही नकारात्मक ऊर्जाओं से भी मुक्ति मिलती है। इस मंत्र को आध्यात्म मुक्ति और आत्म प्राप्ति के मार्ग के रूप में देखा जाता है।

महादेव का आशीर्वाद – मंत्र भगवान महादेव के दिव्य आर्शीवाद और कृपा का आह्वान करने का एक तरीका है। इस मंत्र का भक्तिपूर्वक जाप करने से व्यक्ति का कल्याण , आध्यात्मिक विकास और इच्छाओ की पूर्ति के लिए भगवान शिव का आशीर्वाद मांग सकता है।

Mahadev Gayatri Mantra Video


केतु बीज मंत्र (Ketu Beej Mantra)



केतु बीज मंत्र (Ketu Beej Mantra)

ॐ स्रां स्रीं स्रौं सः केतवे नमः

om sraan sriin srown sah ketave namah

केतु बीज मंत्र अर्थ (Ketu Beej Mantra Meaning)

“ॐ” – परब्रह्म, समस्त ब्रम्हांड का प्रतिक है।

“स्रां स्रीं स्रौं सः” – मन्त्र की शक्ति और एकाग्रता को प्रकट करने के लिए प्रयोग में लाया जाने वाला एक बीज मंत्र है

“केतवे” – केतु ग्रह के लिए (केतु को संकेत करने के लिए)

“नमः” – नमस्कार या आदर का भाव

केतु बीज मंत्र की विधि और सावधानी
 (Ketu Beej MantraVIdhi Sawdhani)

सामग्रीरुद्राक्ष माला की 108 मोतियों की
सफ़ेद चन्दन
अगरबत्ती और धुप दीपक पूजा करने के लिए
ताम्बे के कलश में जल
फूल, माला नारियल
केतु की मूर्ति या फोटो

  • विधिशुद्धि: मंत्र के जाप करने से पहले शुद्धता का ध्यान करके की मंत्र को प्रारम्भ करे।
  • स्थान: मंत्र जाप के लिए शांत और साफ़ सुथरी स्थान का चयन करे ,
  • समय: केतु मंत्र का जाप आप किसी भी समय कर सकते हो प्रातः काल का समय शुभ माना जाता है।
  • आसन: आप अपनी सहजता के अनुसार किसी में आसान में बैठकर अपनी सुविधा के अनुसार इस मंत्र का जाप कर सकते है।
  • मंत्र जाप: मंत्र का जाप सही होना बहुत की आवश्यक होता है इसलिए इस मंत्र का जाप ध्यान लगाकर करे। इस मंत्र को अपनी सुविधा के अनुसार 7 ,11 , 21 , 108 बार कर सकते है इसके अलावा आप 40 दिनो तक भी के सकते है जिस के बाद आपको इसका फलअवश्य ही मिलता है।
  • मेधावी भावना: मंत्र जाप के दौरान केतु ग्रह की शक्ति को महसूस करने का प्रयत्न करें और उनसे अच्छे फल की कामना करे।
सावधानियाँमंत्र का जाप करने के समय मन का एकाग्र होना बहुत ही आवश्यक है। पूरा ध्यान हमें मंत्र पर ही लगाना चाहिये।
आपको अपने गुरु से मंत्र को सही ढंग से करने की जानकारी अवश्य लेनी चाहिए
इस मंत्र का जाप शुद्धतः को विशेष ध्यान देकर तथा किसी गलत कार्य के लिए इस मंत्र का जाप नहीं करना चाहिए।

केतु बीज मंत्र लाभ 
(Ketu Beej Mantra Benefit)

  • केतु ग्रह के शांति: केतु बीज मंत्र का जाप ग्रह दोष को दूर करने के लिए किया जाता है इससे व्यक्ति को ग्रह से संबंधित समस्याओं में सुधार होता है।
  • ज्ञान और बुद्धि का विकास: केतु को ज्ञान का केंद्र भी कहा जाता है, और इसलिए केतु मंत्र का जाप करने से व्यक्ति की बुद्धि में सुधार हो ता है साथ में ही उसे आत्मज्ञान की प्राप्ति भी होती है।
  • आत्मा के साथ संबंध: केतु को छाया ग्रह कहा जाता है जो हमारी आत्मा में छिपा हुआ रहता है। मंत्र की सहायता से व्यक्ति आत्मा के साथ अच्छा सम्बन्ध स्थापित कर सकता है।
  • अन्य ग्रहों के साथ संतुलन: केतु के संतुलन का बिगड़ना अन्य ग्रहों के साथ संबंधित समस्याओं का कारण बन सकता है। केतु मंत्र का जाप करने से व्यक्ति को ग्रहों के संतुलन में सुधार होता है।
  • दुर्भाग्य और दृष्टि दोष के निवारण: केतु बीज मंत्र का जाप करने से बुरी नजर तथा जीवन से दुर्भाग्य दूर हो जाते है।
  • मानसिक स्पष्टता और शांति: केतु बीज मंत्र का जाप करने से मानसिक स्पष्टता और शांति में वृद्धि होती है।
  • सकारात्मक सोच और दृष्टिकोण: केतु बीज मंत्र का जाप करने से सकारात्मक सोच और दृष्टिकोण में भी वृद्धि होती है।
  • अवसरों का आकर्षण: केतु मंत्र का जाप करने से जीवन में नये -नये अवसरों में वृद्धि होती है।
  • जीवन में सफलता: केतु मंत्र का जाप करने से हमें जीवन में सफलता प्राप्त होती है।
Ketu Beej Mantra Video



कन्निका परमेश्वरी गायत्री मंत्र (Kannika Parameshwari Gayatri Mantra)



कन्निका परमेश्वरी गायत्री मंत्र 
(Kannika Parameshwari Gayatri Mantra)

” ओम बाला-रूपिणी विद्महे,

श्री परमेश्वरी धीमहि,

थन्नो कन्या प्रचोदयाथ “

” oma baalaa-ruupiṇii vidmahe,

shrii parameshvarii dhiimahi,

thanno kanyaa prachodayaatha “

कन्निका परमेश्वरी के अन्य मंत्र

“ओम, ह्रीं, श्रीं, क्लीं, आईं, ग्लौं, वं।

श्री वासवि कन्याके मह्यं

सर्व सौभाग्यं देहि देहि स्वाहा।”


कन्निका परमेश्वरी देवी कौन है ?

कुछ कथाओं के अनुसार आज के आंध्रप्रदेश में लगभग ११वी शताब्दी में विष्णुवर्धन नामक एक चालुक्य राजा शासन करता था जो बहुत ही शक्तिशाली था। इसी समय कुसुमा श्रेष्ठि नाम का एक वैश्य विष्णुवर्धन राजा के आधीन पंडुगोडा में निवास करता था। कुसुमा की बुद्धि से प्रशन्न होकर राजा उसके साथ सरदार जैसा व्यवहार करने लगे। कुसुमा के संतान नहीं होने के कारण वे भगवान शिव से प्रार्थना करने लगे जिससे भगवान ने उन्हें संतान के रूप में एक पुत्र और पुत्री दिया।

पुत्री का नाम वासवी था जो बड़ी होकर बहुत ही सुंदर दिखने लगी जिसे देखकर राजा ने वासवी से विवाह करने का मन बना लिया था। इस शादी का विरोध वासवी के माता पिता ने किया लेकिन राजा ने जबरदस्ती वासवी से विवाह करना चाहा अपने शादी वाले दिन दुल्हन के रूप ने वासवी ने शादी करने बजाये अग्नि में कूदकर अपने जीवन का समापन कर दिया।

वासुकी की मृत्यु के बाद वासवी की आत्मा को पांडुगोडा उसी के गांव में पवित्र किया गया इसके बाद सभी लोग वासवी को देवी के सामान पूजने लगे और धीरे -धीरे कन्निका परमेश्वरी के नाम से प्रसिद्ध हो गयी।

कन्निका परमेश्वरी गायत्री मंत्र का अर्थ
 (Kannika Parameshwari Gayatri Mantra Meaning)

हे बालरूपी देवी, हे परमेश्वरी, हमें ज्ञान प्रदान कीजिये । हे कन्या, हमें प्रेरणा प्रदान कीजिये ।

कन्निका परमेश्वरी गायत्री मंत्र सामग्री और विधि 
(Kannika Parameshwari Gayatri Mantra Vidhi)

  • सामग्री: माला: 108 मोतियों की माला का उपयोग करे।
  • जप माला: जिससे मंत्र की गणना की गणना करने में आसानी हो।
  • पूजा सामग्री: जल, फूल, चन्दन, कुंकुम धूप, दीप, नैवेद्य (फल और मिठाई) का उपयोग आदि।
  • शुद्धि: शुद्ध रहने के लिए श्नान करके साफ कपडे पहने।
  • आसन: मंत्र का जाप करने के लिए अपनी सुविधा के अनुसार आसन का प्रयोग करे।
  • मंत्र जाप: अपनी आँखें बंद करें और माँ कन्निका परमेश्वरी की का ध्यान करे।
  • कन्निका परमेश्वरी गायत्री मंत्र का जाप का जाप 108 बार करें।
  • माला का उपयोग: मंत्र का जाप करते समय माला का उपयोग करें, जिसमें 108 मोतियों की माला आमतौर पर प्रचलित होती है। 
  • हर बार मंत्र को एक मोती पर पढ़ें और फिर माला को एक मोती आगे बढ़ाएंऔर गिनते जाये।
  • ध्यान:मंत्र जाप के दौरान माँ कन्निका परमेश्वरी का ध्यान करें।
  • आत्मा के शुद्धि और माँ कन्निका से आशीर्वाद प्राप्त करने का उद्देश्य रखें।
  • समापन:मंत्र जाप के बाद, माँ कन्निका परमेश्वरी की आराधना करें और आशीर्वाद मांगें।
धन्यवाद अर्पित करें और शांति से अपने आद्यात्मिक साधना को समाप्त करें।

कन्निका परमेश्वरी गायत्री मंत्र के लाभ 
(Kannika Parameshwari Gayatri Mantra Benefit)

  • महिलाओं की शुद्धता और पवित्रता की रक्षा: कन्निका परमेश्वरी को कुमारी शक्ति के रूप में जाना जाता है, इसलिए उनका यह मंत्र महिलाओं की शुद्धता और पवित्रता की रक्षा करता है। यह मंत्र महिलाओं के आचरण और विचारों को शुद्ध बनाने में सहायता करता है।

  • मासिक धर्म के दर्द और अन्य समस्याओं को दूर करना: कन्निका परमेश्वरी गायत्री मंत्र का जाप मासिक धर्म के दर्द और अन्य समस्याओं को दूर करने में मदद करता है। यह मंत्र महिलाओं के प्रजनन स्वास्थ्य को बनाए रखने में भी मदद करता है।
  • ज्ञान और बुद्धि: कन्निका परमेश्वरी गायत्री मंत्र का जाप ज्ञान और बुद्धि प्रदान करता है। यह मंत्र छात्रों को अपने अध्ययन में सफल होने में सहायता प्रदान करता है।
  • भक्ति और समर्पण : कन्निका परमेश्वरी गायत्री मंत्र का जाप भक्ति और समर्पण की भावना को बढ़ाता है। यह मंत्र लोगों को देवी कन्निका परमेश्वरी के प्रति अधिक समर्पित बनने में मदद करता है।

Kannika Parameshwari Gayatri Mantra Video



बुद्ध मंत्र (Buddha Mantra)



बुद्ध मंत्र जप की विधि (Buddha Mantra Vidhi)

ध्यान के लिए शांत, सुस्थिर और स्वास्थ्यपूर्ण स्थान चुनें।आँखें बंद करें और गहरे श्वास-ध्यान में चलें।
मंत्रों का जाप करते समय माला का प्रयोग करें, हर मंत्र के उच्चारण के साथ माला की एक माला को छूने।
जितना संभव हो, मंत्रों को स्पष्टता और ध्यान से उच्चारण करें।
ध्यान को जारी रखें, मन को शांत और ध्यानित रखें।

बौद्ध मंत्रों का उच्चारण और जाप नियमित रूप से करने से मानसिक शांति, संतुलन, और आनंद की प्राप्ति होती है। यह ध्यान को शुद्ध करता है और मानवीय गुणों को विकसित करता है।

कृपया ध्यान दें कि मंत्रों का उच्चारण और जाप करने से पहले, एक गुरु या धार्मिक आध्यात्मिक शिक्षक से सलाह लेना उचित हो सकता है।

बुद्ध मंत्र (Buddha Mantra)

बौद्ध धर्म (Buddha Mantra) में कई मंत्र हैं जो शांति, ध्यान, और समय के साथ आनंद को प्राप्त करने में मदद कर सकते हैं। इस आर्टिकल के माध्यम से हम आपको कुछ प्रमुख बौद्ध मंत्रों का उल्लेख अर्थ सहित कर रहे है –
  • ॐ मणि पद्मे हूँ (Om Mani Padme Hum): यह मंत्र बौद्ध धर्म (Buddha Mantra) का प्रमुख मंत्र है। इसे शांति, सौभाग्य, और ध्यान के साथ जपा जाता है।
  • ॐ माणी पद्मे हूँ (Om Maani Padme Hum): यह भी एक प्रसिद्ध बौद्ध मंत्र है, जो सत्यता, सौभाग्य, और सुंदरता की प्राप्ति में मदद करता है।
  • बुद्धं शरणं गच्छामि (Buddham Sharanam Gachhami): यह बुद्ध मंत्र (Buddha Mantra) बीज मंत्र है, जो महात्मा बुद्ध की शरण में जाने का इरादे को व्यक्त करता है।
  • धर्मं शरणं गच्छामि (Dharmam Sharanam Gachhami): यह मंत्र धर्म की शरण में जाने का संकल्प दर्शाता है।
  • संघं शरणं गच्छामि (Sangham Sharanam Gachhami): यह मंत्र संघ की शरण में जाने की प्रार्थना करता है।

ये मंत्र बौद्ध धर्म के महात्माओं और उनकी शिक्षाओं को स्मरण करने और उनके मार्ग पर चलने में सहायता करते हैं। इन मंत्रों को ध्यान और ध्यान के साथ उच्चारण किया जाता है ताकि मन की शांति, स्थिरता और आत्मा की प्राप्ति हो सके।

बुद्ध मंत्र जाप से होने वाले लाभ (Benefit of Buddha Mantra)

बौद्ध मंत्रों (Buddha Mantra) का उच्चारण और जाप करने के कई लाभ होते हैं। ये मंत्र मानसिक, आध्यात्मिक और शारीरिक स्वास्थ्य को सुधारने में मदद कर सकते हैं। निम्नलिखित कुछ महत्वपूर्ण लाभों को बताया गया है जो बौद्ध मंत्रों के उच्चारण से हो सकते हैं
  • शांति और स्थिरता: बौद्ध मंत्रों का जाप करने से मानसिक शांति और स्थिरता मिलती है। ये मंत्र मानसिक चिंताओं को कम करके शांति प्रदान कर सकते हैं।
  • ध्यान और मनोनीति: बौद्ध मंत्रों का उच्चारण करने से ध्यान की स्थिति में प्रवेश करना आसान होता है और मानसिक मनोनीति में सुधार हो सकती है।
  • आत्म-समर्पण और समरसता: ये मंत्र आत्म-समर्पण और समरसता की भावना को विकसित कर सकते हैं, जिससे व्यक्ति दूसरों के प्रति समझदार और सहानुभूति भावना विकसित कर सकता है।
  • शारीरिक स्वास्थ्य: मानसिक चैंबर को शांति और स्थिरता प्रदान करने के साथ-साथ, बौद्ध मंत्रों के जाप से शारीरिक स्वास्थ्य में भी सुधार हो सकती है।
  • आत्मिक विकास: बौद्ध मंत्रों का जाप करने से व्यक्ति का आत्मिक विकास होता है, जिससे उन्हें अपने अंदर की गहराईयों को समझने और स्वीकार करने की क्षमता मिलती है।

बुद्ध मंत्र (Buddha Mantra) ध्यान और साधना के साथ जाप किए जाते हैं। नियमित रूप से इन्हें जाप करने से व्यक्ति का मानसिक और आध्यात्मिक विकास होता है। बौद्ध मंत्रों का जाप करके व्यक्ति अपने जीवन में सामंजस्य, स्थिरता, और शांति की स्थिति में रह सकता है।

  1. Buddha Mantra Video



हनुमान बीज मंत्र (Hanuman Beej Mantra)



हनुमान बीज मंत्र (Hanuman Beej Mantra)

“|| ॐ ऐं भ्रीम हनुमते, श्री राम दूताय नम: ||”

हनुमान बीज मंत्र अंग्रेजी (Hanuman Beej Mantra English)

“|| Om Aim Bhreem Hanumate, Shree Raam Dootaay Namah ||”


हनुमान बीज मंत्र विधि (Hanuman Beej Mantra Vidhi)

हनुमान बीज मंत्र का जाप विशेषकर मंगलवार या शनिवार अथवा किसी भी शुभ दिन को किया जा सकता है। जाप की संख्या कम से कम 108 बार होनी चाहिए। यदि आप अधिक बार जाप करना चाहते हैं, तो यह आपके लिए और भी लाभकारी होगा। हनुमान जी का जाप करके उन्हें भोग के रूप में लड्डू या देसी शुद्ध घी से बने बूंदी चढाने चाहिए। इस मंत्र का जाप करने के लिए लाल आसन पर बैठ कर उत्तर या उत्तर पूर्वी दिशा की ओर मुख करके रुद्राश की माला से 10 बार मंत्र का जाप 40 दिन तक करना चाहिए।

इस मंत्र का जाप दिन में 108 बार करनी चाहिए।
इसके साथ ही ब्रम्हचार्य का पालन भी करना आवश्यक है। मंगलवार के दिन निर्जल व्रत रखना चाहिए इस प्रकार सारे नियम का पालन करते हुए यदि हनुमान जी का यह सिद्धि मंत्र का जाप किया जाता है जीवन में आने वाली सभी बाधाओं से मुक्ति मिलती है।

जाप करते समय मन पर एकाग्रता रखना चाहिए।
जाप करते समय हनुमान जी की प्रतिमा या तस्वीर के सामने बैठना चाहिए।
जाप करते समय पुष्प, धूप, दीप, नैवेद्य आदि अर्पित करना चाहिए।
जाप करते समय हनुमान जी से अपने कार्य की सफलता के लिए प्रार्थना करनी चाहिए।

हनुमान बीज मंत्र नियम 
हनुमान बीज मंत्र (Hanuman Beej Mantra) का सही उच्चारण करना महत्वपूर्ण है। यदि आप मंत्र का सही उच्चारण नहीं कर पा रहे हैं, तो किसी योग्य गुरु से सलाह लेनी चाहिए।

मंत्र का जाप करने से पहले शुद्ध और सात्विक होना चाहिए। इसका मतलब है कि आपको स्नान करना चाहिए, साफ कपड़े पहनने चाहिए, और अपने मन को शांत करना चाहिए।

हनुमान बीज मंत्र (Hanuman Beej Mantra) का जाप नियमित रूप से 7 बार 11 बार तथा 21 बार अपनी शक्ति अनुसार करनी चाहिए। हनुमान बीज मंत्र बहुत ही शक्तिशाली मंत्र है यह हमें सीधा हनुमान जी से जोड़ता है इसलिए इस मंत्र का उपयोग अच्छे कार्यों के लिए किया जाता है।

इस मंत्र का उपयोग मानव कल्याण के लिए किया जाना चाहिए।

हनुमान बीज मंत्र लाभ (Benefit of Hanuman Beej Mantra)

  • आध्यात्मिक विकास: - हनुमान बीज मंत्र (Hanuman Beej Mantra) का प्रयोग व्यक्ति के आध्यात्मिक विकास को समर्थन कर सकता है। हनुमान जी को भक्तों का संरक्षक माना जाता है।
  • भक्ति में स्थिरता: - हनुमान बीज मंत्र (Hanuman Beej Mantra) का जाप भक्ति में स्थिरता और निष्ठा बढ़ा सकता है। इसके माध्यम से व्यक्ति भगवान हनुमान के प्रति अपनी प्रेम भावना को व्यक्त कर सकता है और उनसे संबंध स्थापित कर सकता है।
  • संघर्ष और समस्याओं का निराकरण: - हनुमान जी को उसके भगवान राम जी के असली सेवक के रूप में जाना जाता है जो राम भगवान के सेतु निर्माण में अपने बल और सामर्थ्य को प्रदर्शित करते हैं। हनुमान बीज मंत्र (Hanuman Beej Mantra) का प्रयोग संघर्षों और समस्याओं के समाधान में मदद कर सकता है।
  • शांति और सुख: - हनुमान जी को भक्तों के लिए सुख और शांति का प्रतीक माना जाता है।हनुमान बीज मंत्र (Hanuman Beej Mantra) का जाप शांति, सुख, और प्रसन्नता की प्राप्ति में सहायक हो सकता है।

यह जरूरी है कि मंत्रों का प्रयोग धार्मिक और नैतिक मूल्यों के साथ हो, और व्यक्ति को सच्चे मार्ग पर चलने में मदद करने के लिए होना चाहिए।

  1. Hanuman Beej Mantra Video



साई बाबा मंत्र (Sai Baba Mantra)



ॐ साईं नमो नम:,

श्री साईं नमो नम:,

जय जय साईं नमो नम

सद्गुरु साईं नमो नम:

Sai Baba Mantra in English Lyrics

om saaiin namo nam:,

shrii sai namo namh,

jay jay sai namo namh

sadguru sai namo namh

साई बाबा के अन्य मंत्र ( Other Sai Baba Mantra)

ॐ साईं गुरुवाय नम:
सबका मालिक एक है
ॐ साईं देवाय नम:
ॐ शिर्डी देवाय नम:
ॐ समाधिदेवाय नम:
ॐ सर्वदेवाय रूपाय नम:
ॐ अजर अमराय नम:
ॐ मालिकाय नम:
जय-जय साईं राम

ॐ शिर्डी वासाय विद्महे सच्चिदानंदाय धीमहि तन्नो सांईं प्रचोदयात ||

यह मंत्र साई बाबा के निवास स्थान शिर्डी का उल्लेख करता है। यह मंत्र साई बाबा को एक सच्चिदानंद भगवान के रूप में भी स्वीकार करता है।

साई बाबा मंत्र विधि (Sai Baba Mantra Vidhi)

पर्याप्त स्थान चयन करें: एक शांतिपूर्ण और शुद्ध स्थान का चयन करें जहां आप मंत्र जप कर सकते हैं।

आसन बनाएं: सुखासन या पद्मासन की बैठक में आसन बनाएं जिससे आप ध्यान में स्थिर रह सकें।

माला का उपयोग: साईं बाबा के मंत्र की जप के लिए माला का उपयोग करें। एक माला में 108 मन्त्रों का जप करना एक पूर्ण माला के लिए होता है।

दृष्टि स्थिर करें: आंखें बंद करें और ध्यान केंद्रित करें।

शांति और विश्राम: शांति और विश्राम की भावना के साथ, मन्त्र का जप करें।

आत्म-समर्पण: जब आप मंत्र का उच्चारण कर रहे हैं, तो अपनी भावना और आत्मा को साईं बाबा के समर्पित करें।

नियमितता: मंत्र का नियमित रूप से जाप करना फायदेमंद हो सकता है। नियमितता से मानसिक शांति और आत्मिक उन्नति हो सकती है

साई बाबा मंत्र लाभ (Sai Baba Mantra Benefit)

आध्यात्मिक उन्नति:
साई बाबा के मंत्र का जाप करने से आध्यात्मिक उन्नति हो सकती है और व्यक्ति अपने आत्मा के साथ कनेक्ट हो सकता है।

शांति और संतुलन:
मंत्र का नियमित जाप करने से मानसिक शांति और संतुलन मिल सकता है। यह मानव जीवन में स्थायिता और सामंजस्य का अहसास करा सकता है।

रोग निवारण:
साई बाबा के मंत्र का जाप रोगों को दूर करने में मदद कर सकता है और शारीरिक स्वास्थ्य को सुधार होता है।

जीवन में समृद्धि:
साई बाबा के मंत्र का जाप करने से जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में समृद्धि और सफलता मिल सकती है।

सकारात्मक ऊर्जा का संचार:
साई बाबा मंत्र का जाप करने से सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। इससे व्यक्ति का स्वास्थ्य और सौभाग्य अच्छा रहता है।

मनोरथ सिद्ध:
सच्चे मन से साई बाबा मंत्र का जाप करने से मनोरथ सिद्ध होते हैं। इससे व्यक्ति की सभी इच्छाएं पूरी होती हैं।

Sai Baba Mantra Video



नवनाग स्तोत्र (Navnag Stotra)



अनंतं वासुकि शेष पद्मनाभं च कम्बलम्।

शड्खपाल धार्तराष्ट्र तक्षकं कालियं तथा।।

एतानि नव नामानि नागानां च महात्मनाम्।

सायंकाले पठेन्नित्यं प्रातः काले विशेषतः।।

तस्मे विषभयं नास्ति सर्वत्र विजयीं भवेत्।

Navnag Stotra in English Lyrics

anantam vaasuki shesh padmanaabham ch kambalam.

shaḍkhapaal dhaartaraashṭr takshakam kaaliyam tathaa..

etaani nav naamaani naagaanaan ch mahaatmanaam.

saayankaale paṭhennityam praatah kaale visheshatah..

tasme vishabhayam naasti sarvatr vijayiin bhavet.

कौन है 9 नाग देवता

नवनाग स्त्रोत्र (Navnag stotra) में स्तुति की जाने वाली 9 नाग देवताओं के नाम –अनंतनाग: अनंत को अनंत ज्ञान और शक्ति का प्रतीक माना जाता है, और माना जाता है कि वे ब्रह्मांड को संतुलन में रखते हैं।

वासुकीनाग: वासुकी को विष्णु के साथ जुड़ा हुआ माना जाता है और समुद्र मंथन में उनके शरीर का उपयोग रस्सी के रूप में किया गया था।
शेषनाग: शेषनाग भगवान विष्णु की शय्या के रूप में जाने जाते हैं। उन्हें पृथ्वी को संतुलन में रखने की शक्ति से भी जोड़ा जाता है।
पद्मनाभनाग: पद्मनाभ को उनके विष्णु के नाभि कमल से उद्भव के लिए जाना जाता है, और उन्हें समृद्धि और बहुतायत का प्रतीक माना जाता है।
कम्बलनाग: कम्बल को ज्ञान और बुद्धि का प्रतीक माना जाता है। उन्हें मंत्रों और रहस्यों के संरक्षक के रूप में भी देखा जाता है।
शंखपालनाग: शंखपाल को सुरक्षा और संरक्षण का प्रतीक माना जाता है। उन्हें भक्तों को भय और बुराई से बचाने के लिए जाना जाता है।
धार्तराष्ट्रनाग: धार्तराष्ट्र को धैर्य और दृढ़ता का प्रतीक माना जाता है। उन्हें चुनौतियों का सामना करने और लक्ष्यों को प्राप्त करने में मदद करने के लिए जाना जाता है।
तक्षकनाग: तक्षक को नागों का राजा माना जाता है। उन्हें बुद्धि का प्रतीक माना जाता है।
कालियनाग: कालिय को एक विषैले नाग के रूप में चित्रित किया गया है जिसे भगवान कृष्ण ने नलदमयंतकथा में पराजित किया था। इनके नाम का अर्थ “काल”अथवा “मृत्यु” है, और इनके नाम को अक्सर बुराई और नकारात्मकता का प्रतिनिधित्व करने के लिए इस्तेमाल किया जाता है।

नवनाग स्तोत्र विधि (Navnag Stotra Vidhi)

पवित्रता: स्तोत्र का पाठ करने से पहले, अपने शरीर को धोकर शुद्ध करें।
आसन: सुखासन या पद्मासन में बैठें ताकि आप ध्यान में रह सकें।
ध्यान और समर्पण: पूरा ध्यान नाग देवता की स्तुति पर लगाए और अपनी भक्ति भगवान के प्रति समर्पित करें।
प्राणायाम: कुछ शांति प्राप्ति के लिए प्राणायाम अभ्यास करें।
मंत्र उच्चारण: नवनाग स्तोत्र (Navnag Stotra) के मंत्रों का जाप करें। ध्यानपूर्वक और श्रद्धाभाव से मंत्रों का पाठ करें।
श्रद्धा और भावना: मंत्रों को पढ़ते समय श्रद्धा और भावना के साथ करें, और नाग देवताओं की कृपा की प्रार्थना करें।
ध्यान: ध्यान करते हुए दिव्य स्वरूप में नाग देवताओं को मन में धारण करें और उनकी कृपा के लिए प्रार्थना करें।
धन्यवाद: स्तोत्र का पाठ करने के बाद भगवान को धन्यवाद दें और उनसे आशीर्वाद प्राप्त करे।

नवनाग स्तोत्र लाभ (Navnag Stotra Benefit)

सर्पदंश के भय को दूर करना:
नवनाग स्तोत्र में नौ प्रमुख नाग देवताओं की स्तुति की जाती है। नाग देवताओं को सर्पों के स्वामी माना जाता है। इसलिए, माना जाता है कि नवनाग स्तोत्र का पाठ करने से सर्पदंश का भय दूर होता है।

कालसर्प दोष के संभावित प्रभावों को कम करना:
कालसर्प दोष एक प्रकार का ज्योतिषीय दोष है जो व्यक्ति के जीवन में कई तरह की समस्याएं पैदा कर सकता है। माना जाता है कि नवनाग स्तोत्र का पाठ करने से कालसर्प दोष के संभावित प्रभावों को कम किया जा सकता है।

समृद्धि, सफलता और आत्मविश्वास प्राप्त करना:
नवनाग स्तोत्र के पाठ से मानसिक शांति और आंतरिक संतुलन प्राप्त होता है। इससे व्यक्ति में आत्मविश्वास बढ़ता है और वह अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने में सक्षम होता है।

नकारात्मक ऊर्जा दूर करना और सकारात्मक ऊर्जा बढ़ाना:
स्तोत्र का पाठ करने से व्यक्ति के आसपास की नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। इससे व्यक्ति का जीवन सुखमय और समृद्ध बनता है।

नागों की कृपा:
नाग स्तोत्र का पाठ करने से नाग देवताएँ आप पर कृपा कर सकती हैं, जिससे आपको भय मुक्ति, रोग निवृत्ति और आध्यात्मिक उन्नति हो सकती है।

रोग निवारण:
नाग स्तोत्र का पाठ करने से शारीरिक और मानसिक रोगों की निवृत्ति हो सकती है।

धन लाभ:
नाग स्तोत्र का नियमित पाठ करने से व्यक्ति को धन और समृद्धि की प्राप्ति हो सकती है।
बच्चों की सुरक्षा:
नाग स्तोत्र का पाठ करने से पुत्रत्व की प्राप्ति में सहायता हो सकती है और बच्चों की सुरक्षा के लिए भी आस्तित्व हो सकता है।

दुर्भाग्य शांति:
नाग स्तोत्र का पाठ करने से दुर्भाग्य और नकारात्मक शक्तियों का प्रभाव कम हो सकता है और शुभ फल प्राप्त हो सकता है।

आत्मा की उन्नति:
नाग स्तोत्र का पाठ करने से आत्मा की उन्नति होती है और व्यक्ति आध्यात्मिक साधना में प्रगट हो सकता है।

कष्ट निवारण:
नाग स्तोत्र का पाठ करने से जीवन में आने वाले कष्टों और परेशानियों का निवारण हो सकता है।

Navnag Stotra Video



हनुमान गायत्री मंत्र (Hanuman Gayatri Mantra)


ओम् आंजनेयाय विद्मिहे वायुपुत्राय धीमहि|
तन्नो: हनुमान: प्रचोदयात ||1||

ओम् रामदूताय विद्मिहे कपिराजाय धीमहि |
तन्नो: मारुति: प्रचोदयात||2||

ओम् अन्जनिसुताय विद्मिहे महाबलाय धीमहि|
तन्नो: मारुति: प्रचोदयात ||3||

ओम् ह्रीं ह्रीं हूँ हौं हृ: इति मूल मंत्र |

Hanuman Gayatri Mantra In English Lyrics

Om Aanjeyay Vidmahe Vayuputray Dhimahi |
Tanno: Hanuman: Prachodayat ||1||

Om Ramdutay Vidmahe Kapirajay Dhimahi |
Tanno: Maruti: Prachodayat ||2||

Om Anjanisutay Vidmahe Mahabalaay Dhimahi |
Tanno: Maruti: Prachodayat ||3||

Om Hrim Hrim Hum Houm Hri iti Mul Mantra

हनुमान गायत्री मंत्र का अर्थ (Meaning of Hanuman Gayatri Mantra)

हे अंजनी माता वायु देवता के पुत्र प्रभु हनुमान, हमारी आपसे प्रार्थना है, कि आप हमारी बुद्धि को सही मार्ग प्रदान करे।

हनुमान गायत्री मंत्र विधि (Hanuman Gayatri Mantra Vidhi)

हनुमान गायत्री मंत्र (Hanuman Gayatri Mantra) का जाप विशेषकर मंगलवार या शनिवार अथवा किसी भी शुभ दिन को किया जा सकता है। जाप की संख्या कम से कम 108 बार होनी चाहिए। यदि आप अधिक बार जाप करना चाहते हैं, तो यह आपके लिए और भी लाभकारी होगा। हनुमान जी का जाप करके उन्हें भोग के रूप में लड्डू या देसी शुद्ध घी से बने बूंदी चढाने चाहिए। इस मंत्र का जाप करने के लिए लाल आसन पर बैठ कर उत्तर या उत्तर पूर्वी दिशा की ओर मुख करके रुद्राश की माला से १० बार मंत्र का जाप 40 दिन तक करना चाहिए।
इस मंत्र का जाप दिन में 108 बार करनी चाहिए।

इसके साथ ही ब्रम्हचार्य का पालन भी करना आवश्यक है। मंगलवार के दिन निर्जल व्रत रखना चाहिए इस प्रकार सारे नियम का पालन करते हुए यदि हनुमान जी का यह सिद्धि मंत्र का जाप किया जाता है जीवन में आने वाली सभी बाधाओं से मुक्ति मिलती है।
जाप करते समय मन पर एकाग्रता रखना चाहिए।
जाप करते समय हनुमान जी की प्रतिमा या तस्वीर के सामने बैठना चाहिए।
जाप करते समय पुष्प, धूप, दीप, नैवेद्य आदि अर्पित करना चाहिए।
जाप करते समय हनुमान जी से अपने कार्य की सफलता के लिए प्रार्थना करनी चाहिए।

हनुमान गायत्री मंत्र नियम (Hanuman Gayatri Mantra)

मंत्र का सही उच्चारण करना महत्वपूर्ण है। यदि आप मंत्र का सही उच्चारण नहीं कर पा रहे हैं, तो किसी योग्य गुरु से सलाह लेनी चाहिए।
मंत्र का जाप करने से पहले शुद्ध और सात्विक होना चाहिए। इसका मतलब है कि आपको स्नान करना चाहिए, साफ कपड़े पहनने चाहिए, और अपने मन को शांत करना चाहिए।
इस मंत्र का जाप नियमित रूप से 7 बार 11 बार तथा 21 बार अपनी शक्ति अनुसार करनी चाहिए। हनुमान गायत्री मंत्र (Hanuman Gayatri Mantra) बहुत ही शक्तिशाली मंत्र है यह हमें सीधा हनुमान जी से जोड़ता है इसलिए इस मंत्र का उपयोग अच्छे कार्यों के लिए किया जाता है।
इस मंत्र का उपयोग मानव कल्याण के लिए किया जाना चाहिए।

हनुमान गायत्री मंत्र लाभ (Benefit of Hanuman Gayatri Mantra)

आध्यात्मिक विकास:
हनुमान गायत्री मंत्र (Hanuman Gayatri Mantra) का प्रयोग व्यक्ति के आध्यात्मिक विकास को समर्थन कर सकता है। हनुमान जी को भक्तों का संरक्षक माना जाता है।

भक्ति में स्थिरता:
हनुमान गायत्री मंत्र (Hanuman Gayatri Mantra) का जाप भक्ति में स्थिरता और निष्ठा बढ़ा सकता है। इसके माध्यम से व्यक्ति भगवान हनुमान के प्रति अपनी प्रेम भावना को व्यक्त कर सकता है और उनसे संबंध स्थापित कर सकता है।

संघर्ष और समस्याओं का निराकरण:
हनुमान जी को उसके भगवान राम जी के असली सेवक के रूप में जाना जाता है जो राम भगवान के सेतु निर्माण में अपने बल और सामर्थ्य को प्रदर्शित करते हैं। हनुमान गायत्री मंत्र (Hanuman Gayatri Mantra) का प्रयोग संघर्षों और समस्याओं के समाधान में मदद कर सकता है।

शांति और सुख:
हनुमान जी को भक्तों के लिए सुख और शांति का प्रतीक माना जाता है। हनुमान गायत्री मंत्र (Hanuman Gayatri Mantra) का जाप शांति, सुख, और प्रसन्नता की प्राप्ति में सहायक हो सकता है।

यह जरूरी है कि मंत्रों का प्रयोग धार्मिक और नैतिक मूल्यों के साथ हो, और व्यक्ति को सच्चे मार्ग पर चलने में मदद करने के लिए होना चाहिए।

Hanuman Gayatri Mantra Video