🕉️ ॥ गोविन्दाष्टकम् ॥
(अर्थ, लाभ, समय, FAQ सहित)
📖 परिचय
गोविन्दाष्टकम् आदि गुरु श्री आदि शंकराचार्य द्वारा रचित एक पवित्र स्तोत्र है, जो भगवान श्रीकृष्ण (गोविन्द) की महिमा का वर्णन करता है। इसका पाठ करने से मन को शांति और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा मिलती है।
🔱 गोविन्दाष्टकम् (पूर्ण श्लोक)
॥ १ ॥ सत्यं ज्ञानमनंतं नित्यमनाकाशं परमाकाशम् ।
गोष्ठप्राङ्गणरिङ्खणलोलमनायासं परमायासम् ।
मायाकल्पितनानाकारमनाकारं भुवनाकारम् ।
क्ष्माया नाथमनाथं प्रणमत गोविंदं परमानंदम् ॥
॥ २ ॥ मृत्स्नामत्सीहेति यशोदाताडनशैशव संत्रासम् ।
व्यदितवक्त्रालोकितलोकालोकचतुर्दशलोकालिम् ।
लोकत्रयपुरमूलस्तंभं लोकालोकमनालोकम् ।
लोकेशं परमेशं प्रणमत गोविंदं परमानंदम् ॥
॥ ३ ॥ त्रैविष्टपरिपुवीरघ्नं क्षितिभारघ्नं भवरोगघ्नम् ।
कैवल्यं नवनीताहारमनाहारं भुवनाहारम् ।
वैमल्यस्फुटचेतोवृत्तिविशेषाभासमनाभासम् ।
शैवं केवलशांतं प्रणमत गोविंदं परमानंदम् ॥
॥ ४ ॥ गोपालं प्रभुलीलाविग्रहगोपालं कुलगोपालम् ।
गोपीखेलनगोवर्धनधृतिलीलालालितगोपालम् ।
गोभिर्निगदित गोविंदस्फुतनामानं बहुनामानम् ।
गोपीगोचरपथिकं प्रणमत गोविंदं परमानंदम् ॥
॥ ५ ॥ गोपीमंडलगोष्ठिभेदं भेदावस्थमभेदाभम् ।
शश्वद्गोखुरनिर्घूतोद्धतधूलीधूसरसौभाग्यम् ।
श्रद्धाभक्तिगृहीतानंदमचिन्त्यं चिंतितसद्भावम् ।
चिंतामणिमहिमानं प्रणमत गोविंदं परमानंदम् ॥
॥ ६ ॥ स्नानव्याकुलयोशिद्वस्त्रमुपादायागमुपारूढम् ।
व्यदित्संतिरथ दिग्वस्त्रा ह्युपुदातुमुपाकर्षंतम् ।
निर्धूतद्वयशोकविमोहं बुद्धं बुद्धेरंतस्थम् ।
सत्तामात्रशरीरं प्रणमत गोविंदं परमानंदम् ॥
॥ ७ ॥ कांतं कारणकारणमादिमनादिं कालमनाभासम् ।
कालिंदीगतकालियशिरसि मुहुर्नृत्यंतं नृत्यंतम् ।
कालं कालकलातीतं कलिताशेषं कलिदोषघ्नम् ।
कालत्रयगतिहेतुं प्रणमत गोविंदं परमानंदम् ॥
॥ ८ ॥ वृंदावनभुवि वृंदारकगणवृन्दाराध्यं वंदेऽहम् ।
कुंदाभामलमंदस्मेरसुधानंदं सुहृदानंदम् ।
वंद्याशेषमहामुनिमानसवंद्यानंदपदद्वंद्वम् ।
वंद्याशेषगुणाब्धिं प्रणमत गोविंदं परमानंदम् ॥
📜 फलश्रुति
गोविंदाष्टकमेतदधीते गोविंदार्पितचेता यो ।
गोविंदाच्युत माधव विष्णो गोकुलनायक कृष्णेति ।
गोविंदाङ्घ्रिसरोजध्यानसुधाजलधौतसमस्ताघो ।
गोविंदं परमानंदामृतमंतःस्थं स तमभ्येति ॥
🪔 अर्थ (Meaning Summary)
- भगवान गोविन्द (कृष्ण) परम सत्य और आनंद के स्वरूप हैं
- वे सम्पूर्ण ब्रह्मांड के आधार और रक्षक हैं
- उनकी बाल लीलाएं और दिव्य रूप भक्तों को आकर्षित करते हैं
- वे भक्ति, मोक्ष और शांति प्रदान करने वाले हैं
🌟 लाभ (Benefits)
- मानसिक शांति और सुकून मिलता है
- नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है
- भगवान कृष्ण की कृपा प्राप्त होती है
- जीवन में सुख और समृद्धि आती है
- भक्ति और आध्यात्मिक उन्नति होती है
⏰ पाठ करने का सही समय
- सुबह ब्रह्म मुहूर्त
- शाम पूजा के समय
- एकादशी और जन्माष्टमी पर विशेष फल
❓ FAQ
Q1. गोविन्दाष्टकम् किसने लिखा?
👉 आदि शंकराचार्य जी ने
Q2. क्या रोज पढ़ सकते हैं?
👉 हाँ, रोज पढ़ना बहुत शुभ है
Q3. कितनी बार पढ़ना चाहिए?
👉 1, 3 या 11 बार
Q4. मुख्य लाभ क्या है?
👉 शांति, भक्ति और मोक्ष
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