🌸 "हर सुबह भगवान का आभार व्यक्त करें, क्योंकि हर दिन एक नई शुरुआत है।" 🌟 "सकारात्मक सोच से जीवन में चमत्कार होते हैं।" 🙏 "ईश्वर पर भरोसा रखें, और वह आपको सही रास्ता दिखाएंगे।" 🕉️ "भक्ति और श्रद्धा से भरा जीवन, सच्ची खुशी का मार्ग है।" 🌺 "यहां आपको भक्ति भजन, चालीसा, आरती और आध्यात्मिक कहानियों का संग्रह मिलेगा।" ✨ "हनुमान चालीसा का पाठ करें और भगवान हनुमान की कृपा प्राप्त करें।" 🌼 "मां दुर्गा की आराधना करें और अपने जीवन में सुख, शांति और समृद्धि लाएं।" 📜 "रामायण और महाभारत की कहानियों से प्रेरणा लें।" 🧘 "ध्यान और योग के माध्यम से अपने मन को शांति और आत्मा को आनंद से भरें।" 🔔 "भारतीय त्योहारों की महिमा और उनके आध्यात्मिक महत्व को समझें।"

Jagannath Ashtakam – Full Lyrics, Meaning, Benefits & Chanting Time

Jagannath Ashtakam devotional image featuring Lord Jagannath, Balabhadra and Subhadra on chariot with glowing aura and Devotional Hub logo

🕉️ ॥ जगन्नाथाष्टकम् ॥ 

(अर्थ, लाभ, पाठ का समय और FAQ)

📖 परिचय

जगन्नाथाष्टकम् एक पवित्र स्तोत्र है जो भगवान भगवान जगन्नाथ की स्तुति में गाया जाता है। यह स्तोत्र भक्तों को भक्ति, शांति और भगवान की कृपा प्राप्त करने में सहायक होता है।


🔱 जगन्नाथाष्टकम् (पूर्ण श्लोक)

॥ 1 ॥ कदाचित्कालिन्दीतटविपिनसंगीतकरवो

मुदा गोपीगोपीनवजलकुहेलीनिकरः।
श्रीगोपीनाथो जयति मुरलीवादनरतः
जगन्नाथः स्वामी नयनपथगामी भवतु मे॥

॥ 2 ॥ भुजे सव्ये वेणुं शिरसि शिखिपिञ्छं कटितटे

दुकूलं नेत्रान्ते सहचरकटाक्षं विदधते।
सदा श्रीमद्वृन्दावनवसतिलीलापरिचयो
जगन्नाथः स्वामी नयनपथगामी भवतु मे॥

॥ 3 ॥ महाम्भोधेस्तीरे कनकरुचिरे नीलशिखरे

वसन् प्रासादान्तः सहजबलभद्रेण बलिना।
सुभद्रामध्यस्थः सकलसुरसेवावसरदो
जगन्नाथः स्वामी नयनपथगामी भवतु मे॥

॥ 4 ॥ कृपापारावारः सजलजलदश्रेणिरुचिरो

रमा वाणी रामः स्फुरदमलपद्माक्षमुखः।
सुरेन्द्रैराराध्यः श्रुतिगणशिखागीतचरितो
जगन्नाथः स्वामी नयनपथगामी भवतु मे॥

॥ 5 ॥ रथारूढो गच्छन् पथि मिलितभूदेवपटलैः

स्तुतिप्रादुर्भावं प्रतिपदमुपाकर्ण्य सदयः।
दयासिन्धुर्बन्धुः सकलजगतां सिन्धुसुतया
जगन्नाथः स्वामी नयनपथगामी भवतु मे॥

॥ 6 ॥ परब्रह्मापीडः कुबलयदलोत्फुल्लनयनः

निवासी नीलाद्रौ निहितचरणोऽनन्तशिरसि।
रथारूढो गच्छन् पथि मिलितभूदेवपटलैः
जगन्नाथः स्वामी नयनपथगामी भवतु मे॥

॥ 7 ॥ न वै याचे राज्यं न च कनकमानिक्यविभवं

न याचेऽहं रम्यां सकलजनकाम्यां वरवधूम्।
सदा काले काले प्रमथपतिना गीतचरितो
जगन्नाथः स्वामी नयनपथगामी भवतु मे॥

॥ 8 ॥ हर त्वं संसारं द्रुततरमसारं सुरपते

हर त्वं पापानां विततिमपरां यादवपते।
अहो दीननाथं निहितमचलं निश्चितपदं
जगन्नाथः स्वामी नयनपथगामी भवतु मे॥

॥ 9 ॥ जगन्नाथाष्टकं पुन्यं यः पठेत् प्रयतः शुचिः ।

सर्वपाप विशुद्धात्मा विष्णुलोकं स गच्छति ॥९॥


🪔 अर्थ (Meaning Summary)

  • भगवान जगन्नाथ का स्वरूप अत्यंत दिव्य और करुणामय है
  • वे भक्तों को अपने दर्शन और कृपा से आनंद प्रदान करते हैं
  • रथ यात्रा में वे सभी भक्तों को दर्शन देकर आशीर्वाद देते हैं
  • सच्चा भक्त उनसे केवल भक्ति और मोक्ष की कामना करता है


🌟 लाभ (Benefits)

  • 🙏 भगवान की कृपा प्राप्त होती है
  • 🧘 मन को शांति और स्थिरता मिलती है
  • ✨ पापों का नाश होता है
  • 💖 भक्ति और श्रद्धा में वृद्धि होती है
  • 🌸 जीवन में सुख और सकारात्मकता आती है


⏰ पाठ करने का समय

  • सुबह ब्रह्म मुहूर्त
  • शाम पूजा के समय
  • रथ यात्रा और विशेष पर्वों पर अत्यधिक फलदायक


❓ FAQ

Q1. जगन्नाथाष्टकम् किसके लिए है?
👉 भगवान जगन्नाथ की स्तुति के लिए

Q2. क्या रोज पढ़ सकते हैं?
👉 हाँ, रोज पढ़ना शुभ है

Q3. मुख्य लाभ क्या है?
👉 शांति, भक्ति और पापों से मुक्ति

Q4. कब पढ़ना सबसे अच्छा है?
👉 सुबह या शाम पूजा के समय


🙏 निष्कर्ष

जगन्नाथाष्टकम् भगवान जगन्नाथ की भक्ति का अत्यंत प्रभावशाली स्तोत्र है। इसका नियमित पाठ जीवन में शांति, भक्ति और सकारात्मक ऊर्जा लाता है।

॥ इति श्री जगन्नाथाष्टकम् ॥


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