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Ardhanarishvara Stotram – Lyrics, Meaning, Benefits & Puja Time

🕉️ अर्धनारीश्वर स्तोत्र

(Ardhanarishvara Stotram)

Ardhanarishvara Stotram

📖 परिचय

अर्धनारीश्वर स्तोत्र भगवान शिव और माता पार्वती के संयुक्त रूप अर्धनारीश्वर की स्तुति है।
यह स्तोत्र आदि शंकराचार्य द्वारा रचित माना जाता है।

यह हमें सिखाता है कि पुरुष और स्त्री दोनों ऊर्जा मिलकर ही सृष्टि का निर्माण करते हैं।


🔱 अर्धनारीश्वर स्तोत्र (Sanskrit)

1. चम्पेयगौरार्धशरीरकायै
कर्पूरगौरार्धशरीरकाय।
धम्मिल्लकायै च जटाधराय
नमः शिवायै च नमः शिवाय॥

2. कस्तूरिकाकुंकुमचर्चितायै
चितारजःपुञ्जविचर्चिताय।
कृतस्मरायै विकृतस्मराय
नमः शिवायै च नमः शिवाय॥

3. रुणद्धकन्यै रुणद्धकेशाय
निषण्णभूषाय निषण्णभूषाय।
नमः शिवायै च नमः शिवाय॥

4. मन्दारमालाकलितालकायै
कपालमालाङ्कितकन्धराय।
दिव्याम्बरायै च दिगम्बराय
नमः शिवायै च नमः शिवाय॥

5. अम्भोधरश्यामलकुन्तलायै
तटित्प्रभाताम्रजटाधराय।
नमः शिवायै च नमः शिवाय॥

6. प्रदीप्तरत्नोज्ज्वलकुण्डलायै
स्फुरन्महापन्नगभूषणाय।
शिवान्वितायै च शिवान्विताय
नमः शिवायै च नमः शिवाय॥

7. प्रपञ्चसृष्ट्युन्मुखलास्यकायै
समस्तसंहारकताण्डवाय।
जगज्जनन्यै जगदेकपित्रे
नमः शिवायै च नमः शिवाय॥

8. प्रदीप्तरत्नोज्ज्वलकुण्डलायै
स्फुरन्महापन्नगभूषणाय।
शिवान्वितायै च शिवान्विताय
नमः शिवायै च नमः शिवाय॥


🪔 अर्थ (Meaning)

  • अर्धनारीश्वर रूप में भगवान शिव और माता पार्वती एक साथ हैं
  • यह पुरुष (शिव) और स्त्री (शक्ति) के संतुलन को दर्शाता है
  • सृष्टि के निर्माण में दोनों का समान महत्व है
  • यह हमें जीवन में संतुलन और सामंजस्य सिखाता है


🌟 लाभ (Benefits)

  • 🔱 शिव और शक्ति दोनों की कृपा मिलती है
  • 💑 दांपत्य जीवन में सुख और सामंजस्य
  • 🧘 मानसिक संतुलन और शांति
  • 💫 जीवन में सकारात्मक ऊर्जा
  • 🕉️ आध्यात्मिक उन्नति


⏰ पाठ करने का सही समय

  • सुबह ब्रह्म मुहूर्त
  • सोमवार के दिन
  • महाशिवरात्रि
  • विवाह या दांपत्य सुख के लिए विशेष


❓ FAQ (SEO Friendly)

1. अर्धनारीश्वर का क्या अर्थ है?

अर्धनारीश्वर का अर्थ है आधा पुरुष (शिव) और आधा स्त्री (पार्वती)।

2. इस स्तोत्र को पढ़ने से क्या लाभ होता है?

जीवन में संतुलन, सुख और शिव-पार्वती की कृपा प्राप्त होती है।

3. यह स्तोत्र किसने लिखा?

इसे आदि शंकराचार्य द्वारा रचित माना जाता है।

4. इसे कब पढ़ना चाहिए?

सुबह या सोमवार के दिन पढ़ना सबसे शुभ होता है।

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