ओं ब्रह्मणे नमः ।
ओं गायत्रीपतये नमः ।
ओं सावित्रीपतये नमः ।
ओं सरस्वतीपतये नमः ।
ओं प्रजापतये नमः ।
ओं हिरण्यगर्भाय नमः ।
ओं कमण्डलुधराय नमः ।
ओं रक्तवर्णाय नमः ।
ओं ऊर्ध्वलोकपालाय नमः । ९
ओं वरदाय नमः ।
ओं वनमालिने नमः ।
ओं सुरश्रेष्ठाय नमः ।
ओं पितमहाय नमः ।
ओं वेदगर्भाय नमः ।
ओं चतुर्मुखाय नमः ।
ओं सृष्टिकर्त्रे नमः ।
ओं बृहस्पतये नमः ।
ओं बालरूपिणे नमः । १८
ओं सुरप्रियाय नमः ।
ओं चक्रदेवाय नमः ।
ओं भुवनाधिपाय नमः ।
ओं पुण्डरीकाक्षाय नमः ।
ओं पीताक्षाय नमः ।
ओं विजयाय नमः ।
ओं पुरुषोत्तमाय नमः ।
ओं पद्महस्ताय नमः ।
ओं तमोनुदे नमः । २७
ओं जनानन्दाय नमः ।
ओं जनप्रियाय नमः ।
ओं ब्रह्मणे नमः ।
ओं मुनये नमः ।
ओं श्रीनिवासाय नमः ।
ओं शुभङ्कराय नमः ।
ओं देवकर्त्रे नमः ।
ओं स्रष्ट्रे नमः ।
ओं विष्णवे नमः । ३६
ओं भार्गवाय नमः ।
ओं गोनर्दाय नमः ।
ओं पितामहाय नमः ।
ओं महादेवाय नमः ।
ओं राघवाय नमः ।
ओं विरिञ्चये नमः ।
ओं वाराहाय नमः ।
ओं शङ्कराय नमः ।
ओं सृचाहस्ताय नमः । ४५
ओं पद्मनेत्रे नमः ।
ओं कुशहस्ताय नमः ।
ओं गोविन्दाय नमः ।
ओं सुरेन्द्राय नमः ।
ओं पद्मतनवे नमः ।
ओं मध्वक्षाय नमः ।
ओं कनकप्रभाय नमः ।
ओं अन्नदात्रे नमः ।
ओं शम्भवे नमः । ५४
ओं पौलस्त्याय नमः ।
ओं हंसवाहनाय नमः ।
ओं वसिष्ठाय नमः ।
ओं नारदाय नमः ।
ओं श्रुतिदात्रे नमः ।
ओं यजुषां पतये नमः ।
ओं मधुप्रियाय नमः ।
ओं नारायणाय नमः ।
ओं द्विजप्रियाय नमः । ६३
ओं ब्रह्मगर्भाय नमः ।
ओं सुतप्रियाय नमः ।
ओं महारूपाय नमः ।
ओं सुरूपाय नमः ।
ओं विश्वकर्मणे नमः ।
ओं जनाध्यक्षाय नमः ।
ओं देवाध्यक्षाय नमः ।
ओं गङ्गाधराय नमः ।
ओं जलदाय नमः । ७२
ओं त्रिपुरारये नमः ।
ओं त्रिलोचनाय नमः ।
ओं वधनाशनाय नमः ।
ओं शौरये नमः ।
ओं चक्रधारकाय नमः ।
ओं विरूपाक्षाय नमः ।
ओं गौतमाय नमः ।
ओं माल्यवते नमः ।
ओं द्विजेन्द्राय नमः । ८१
ओं दिवानाथाय नमः ।
ओं पुरन्दराय नमः ।
ओं हंसबाहवे नमः ।
ओं गरुडप्रियाय नमः ।
ओं महायक्षाय नमः ।
ओं सुयज्ञाय नमः ।
ओं शुक्लवर्णाय नमः ।
ओं पद्मबोधकाय नमः ।
ओं लिङ्गिने नमः । ९०
ओं उमापतये नमः ।
ओं विनायकाय नमः ।
ओं धनाधिपाय नमः ।
ओं वासुकये नमः ।
ओं युगाध्यक्षाय नमः ।
ओं त्रिराज्याय नमः ।
ओं सुभोगाय नमः ।
ओं तक्षकाय नमः ।
ओं पापहर्त्रे नमः । ९९
ओं सुदर्शनाय नमः ।
ओं महावीराय नमः ।
ओं दुर्गनाशनाय नमः ।
ओं पद्मगृहाय नमः ।
ओं मृगलाञ्छनाय नमः ।
ओं वेदरूपिणे नमः ।
ओं अक्षमालाधराय नमः ।
ओं ब्राह्मणप्रियाय नमः ।
ओं विधये नमः । १०८
इति श्री ब्रह्माष्टोत्तरशतनामावली ॥
श्री ब्रह्माष्टोत्तरशतनामावली का पाठ करने के लिए नीचे दी गई विधि का पालन करें:
- सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें
- पूजा स्थान को साफ करके भगवान ब्रह्मा की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें
- दीपक जलाएं और धूप-अगरबत्ती अर्पित करें
- फूल, अक्षत और जल से पूजा करें
- शांत मन से ब्रह्मा जी के 108 नामों का जप करें
- अंत में भगवान से सुख-समृद्धि और ज्ञान की प्रार्थना करें
📿 विशेष: गुरुवार का दिन और ब्रह्म मुहूर्त इस पाठ के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है।
इस स्तोत्र के नियमित पाठ से कई आध्यात्मिक लाभ प्राप्त होते हैं:
- 🧠 ज्ञान और बुद्धि में वृद्धि होती है
- 🕊️ मन को शांति और स्थिरता मिलती है
- 🌟 सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है
- 📚 विद्या और शिक्षा में सफलता मिलती है
- 🙏 जीवन में सुख-समृद्धि और संतुलन आता है
- श्री ब्रह्माष्टोत्तरशतनामावली भगवान ब्रह्मा के 108 पवित्र नामों का संग्रह है
- भगवान ब्रह्मा को सृष्टि का रचयिता माना जाता है
- यह पाठ विशेष रूप से ज्ञान, सृजन और बुद्धि के लिए किया जाता है
- विद्यार्थी, शिक्षक और ज्ञान प्राप्ति की इच्छा रखने वालों के लिए यह अत्यंत लाभकारी है
- नियमित जप से आध्यात्मिक उन्नति और आत्मविश्वास बढ़ता है
❓FAQ
1. ब्रह्माष्टोत्तरशतनामावली क्या है?
यह भगवान ब्रह्मा के 108 पवित्र नामों का संग्रह है, जिसे जपने से ज्ञान और सकारात्मक ऊर्जा मिलती है।
2. इसका पाठ कब करना चाहिए?
सुबह स्नान के बाद या किसी भी शुभ समय में शांत मन से इसका पाठ करना सबसे उत्तम माना जाता है।
3. ब्रह्माष्टोत्तरशतनामावली के लाभ क्या हैं?
इससे ज्ञान की वृद्धि, मन की शांति और जीवन में सकारात्मकता आती है।
4. क्या कोई भी इसका पाठ कर सकता है?
हाँ, कोई भी श्रद्धा और भक्ति से इसका पाठ कर सकता है।
5. कितनी बार पाठ करना चाहिए?
आप रोज एक बार या 11 बार जप कर सकते हैं, विशेष अवसर पर 108 बार भी किया जाता है।
